Loading...

ईर्ष्या हमारी आशीष की एक बाधा है!

Sharon Dhinakaran
09 Dec
मसीह में प्रिय मित्रों, 
हम सभी को अच्छे और बुरे गुण होते हैं। अच्छे गुण सच्चाई, शांति, प्रेम, विश्‍वास आदि हैं और बुरे गुण घृणा, क‘ोध, ईर्ष्या, झूठ आदि है। हम दोनों गुणों में भिन्नता पहचान सकते हैं और दूसरों पर दोष भी लगा सकते हैं। क्या आप ने कभी ईर्ष्या के बारे में सोचा है? यदि आप किसी से नफरत करते हैं तो आपको ये अस्वीकार होगा। परन्तु वास्तव में आप ने इसका सामना किया होगा। आपको यह समझना चाहिए कि ये एक ऐसा विषय नहीं है। बाइबल में कई जगहों पर ईर्ष्या के बारे में कहा गया है और हमें अपने आत्मिक जीवन के पहलुओं में चौकस रहना चाहिए। हम घमण्डी होकर न एक दूसरे को छेडें, न एक दूसरे से डाह करें। (गलातियों 5:26) 

मैं इसके बारे में और बहुत कुछ बताती हूं। ईर्ष्या जो शैतान का बलशाली यंत्र है वह उसे हमारी शांति और आशीषित जीवन में गडबडी लाने के लिए इस्तेमाल करता है। वह धीरे धीरे आपके हृदयों और मनों में रेंगता है और अंत में आपके जीवन को तबाह करता है। आप क्यों जलते हैं? इसके कई कारण हो सकते हैं। सब से पहले आपका कार्यस्थल होगा जहां पर आप पदोन्नति पाने की कोशिश करते हैं। आप पदोन्नति पाने की पंक्ति में होंगे और अचानक आपको नकारा जाता है। दूसरे दुष्ट लोगों की स’लता को देखकर अकसर धर्मीजन भी एक कुकर्मी बन जाता है और उन पर दोष लगाना शुरु कर देता है। परन्तु बाइबल कहती है, कुकर्मियों के कारण मत कुढ, कुटिल काम करनेवालों के विषय डाह न कर! (भजन संहिता 37:1) आपको परमेश्‍वर का भाग छोड देना चाहिए केवल आप अपना कार्य करें। 
यीशु ने भी आराधनलय के अगुवों और साधारण लोगों के द्वारा ईर्ष्यालु के क‘ूरता के कार्य का शिकार बना। यीशु चारों तरफ अद्भुत कार्यों और चमत्कारों को करता गया और इस प्रकार अपनी प्रसिद्धि बढाई। ये भलाई और कृपालुता के कार्य लोगों को नहीं भाए परन्तु पिलातुस जिसे हर न्याय करने का अधिकार था, वह अच्छी तरह से जानता था कि यीशु निर्दोष है। इसलिए शैतान ने यीशु को भी नहीं छोडा। अत: हमें भी अपने जीवनों में बहुत अधिक चौकस रहना चाहिए और शैतान को हमारे जीवनों के अंदर प्रवेश करने नहीं देना चाहिए। जो कुछ आपके पास है उसे आपको संतुष्ट रहना चाहिए और उसके लिए प्रभु को धन्यवाद देना चाहिए। 
क्या आप जानते हैं शैतान आपके जीवनों में अपना मार्ग कब पाता है? जब आप परमेश्‍वर को धन्यवाद देना भूल जाते हैं और दूसरों की चीजों के लिए बडबडाना शुरु कर देते हैं। आप खुद को दूसरों से उनकी जीवन शैली और उनकी बढती सफलता और उनके महंगे कपडों को खरीदते देखकर उनसे तुलना करनी शुरु कर देते हैं। इन सभी के द्वारा आप शैतान को आसानी से स्वागत करते हैं। तुम्हारा स्वभाव लोभरहित हो और जो तुम्हारे पास है उसी पर संतोष करो। (इब‘ानियों 13:5) 

मूसा भी परमेश्‍वर का चुना हुआ पात्र था और परमेश्‍वर को आमने - सामने बात किया करता था। उनके अपने भाई बहन उससे ईर्ष्या करने लगे और परमेश्‍वर को अपने सेवक के लिए ऐसा स्वभाव अच्छा नहीं लगा। उसका प्रतिफल ऐसा हुआ कि मूसा की बहन मरियम को कोढी कर दिया। मूसा ने उसके लिए प्रार्थना की और उस ने अपनी चंगाई पाई। 

मैं आपको एक कहानी सुनाना चाहती हूं। एक बार एक मेंढक का बच्चा झील के पानी से बाहर आ कूदा और उस ने एक गाय को देखा। उस विशाल जन्तु को देखकर उसे बहुत ही आश्‍चर्य हुआ। उस ने सोचा था कि केवल उसकी मां ही सब से विशाल है। इसलिए वह वापस आकर अपनी मां से उस जन्तु के बारे में कहा। उस पर उसकी मां ने खुद को फुलाया यह साबित करना चाहती थी कि वह गाय से विशाल है। अंत में वह इतनी फूग गई कि वह फट कर मर गई। इसलिए जो कुछ आपके पास है उससे संतुष्ट होना चाहिए और आप अपनी जरूरतों के लिए निरंतर प्रार्थना करनी चाहिए।  
Prayer:
सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर, मेरे जीवन में आपकी सभी आशीषों के लिए आपको धन्यवाद देता/देती हूं। मेरे मित्रों और मेरे पडोसियों के विरोध मेरी सारी बडबडाहट के लिए क्षमा करें। आप जानते हैं कि मेरे लिए क्या बेहतरीन है। मैं इसे सही समय में पाने के लिए प्रतीक्षा कर रहा/रही हूं। यीशु के अनमोल नाम में आमीन!

1800 425 7755 / 044-33 999 000